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Published : 13 December, 2021


ओंकोलॉजी फोरम के तहत शहर के अग्रणी कैंसर विशेषज्ञों ने स्टेज-4 के ‘ईविंग्स सारकोमा’ यानी हड्डियों के कैंसर के इलाज के विकल्पों पर विमर्श किया। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में कैंसर केयर सेंटर्स के विभाग प्रमुखों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सभी विशेषज्ञों ने आखिरी स्टेज के हड्डियों के कैंसर के इलाज के लिए एक मानक प्रोटोकॉल बनाने पर जोर दिया।

आरजीसीआईआरसी के ऑर्थोपेडिक ओंकोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. हिमांशु रोहेला ने कहा, ‘अब तक स्टेज-4 के बोन कैंसर के मरीजों के बचने की संभावना बमुश्किल कुछ महीने तक ही रहती थी। विभिन्न कैंसर संस्थानों में इलाज कर रहे विशेषज्ञों की समझ के आधार पर इन मरीजों को अलग-अलग प्रोटोकॉल के हिसाब से इलाज दिया जाता था। हाल ही में कई नई थेरेपी से आखिरी स्टेज के कैंसर के मामले में भी अच्छे नतीजे देखे गए हैं। इनमें टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनो थेरेपी या अलग-अलग थेरेपी का कॉम्बिनेशन शामिल है, जिनसे मरीज 3 से 4 चार तक जीवित रह पाता है और उसका जीवन भी बेहतर होता है।’