Published : 24 August, 2023
प्रायः सारकोमा यानी बोन ट्यूमर के मामले बहुत कम होते हैं। इसी कारण से कई बार ऐसे मामलों में सही जांच और सही इलाज नहीं मिल पाता है, जो अंततः मरीज के लिए घातक सिद्ध होता है। सारकोमा अस्थियों और नरम ऊतकों (सॉफ्ट टिश्यू) का कैंसर होता है। गलत जांच और अनुचित इलाज के कारण बोन ट्यूमर के मामलों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की चुनौतियों को लेकर राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट (आरजीसीआई) ने पहली ओआरपी बैठक का आयोजन किया। यह आयोजन इंडियन मसकुलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी सोसायटी (आईएमएसओएस), दिल्ली मसकुलोस्केलेटल ऑन्कोलॉजी ग्रुप (डीएमएसओजी) और सारकोमा एजुकेशन फाउंडेशन के सहयोग से किया गया। आरजीसीआई के कंसल्टेंट एवं ऑर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजी हेड और ओआरपी मीट के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. हिमांशु रोहेला ने कहा, दुर्भाग्य से हाथ-पैरों में सारकोमा ट्यूमर की अक्सर जांच नहीं हो पाती है या फिर गलत तरह से सर्जरी कर दी जाती है। ऐसे मामलों में हाथ या पैर के खराब हो जाने का खतरा रहता है, जिससे किशोरों या बच्चों की पूरी जिंदगी प्रभावित होती है। ओआरपी बैठक का आयोजन सामान्य ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं चिकित्सकों के बीच बोन ट्यूमर को सही तरह समझने, इसकी जांच और इलाज के उपलब्ध तरीकों, इससे जुड़ी सामान्य समस्याओं और उनके समाधान के बारे में जागरूकता लाने के लिए किया गया।
